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खुश रहो और चुदाई करो

Khush raho aur chudai karo:

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मेरा नाम आरती है और मैं एक फैशन डिज़ाइनर हूं। मैं मुंबई की रहने वाली एक खुले विचारों वाली लड़की हूं। मेरे पिताजी भी डायमंड व्यापारी हैं और वह मुझे हमेशा ही कहते हैं कि तुम अपनी जिंदगी अच्छे से जिया करो। शादी के बाद तो तुम पता नहीं कैसे अपनी जिंदगी काटोगी। इस वजह से मैं अपनी लाइफ को पूरे अपने विचारों में ही जीती हूं और अपने तरीके से रहना पसंद करती हूं। मेरे घर वालों ने कभी भी मुझे किसी चीज के लिए रोका नहीं और ना ही वह मुझ पर किसी भी तरीके से कोई बंदिश डालते हैं। उन्हें बहुत ही अच्छा लगता है जब मैं उनके साथ समय बिताती हूं। वह लोग बहुत ही खुश हो जाते हैं। जब मैं अपने कॉलेज में थी तो वहां पर मेरी एक दोस्त थी उसका नाम रेखा है। वह बहुत ही खुले विचारों की लड़की थी। वह भी अपनी जिंदगी को अच्छे से जीना चाहती थी। परंतु उसके घर वालों ने उसकी शादी करवा दी।

जब उसकी शादी हुई तो वह बहुत दुखी थी और मैं भी उसकी शादी में गई थी वह कह रही थी कि मैं शादी नहीं करना चाहती लेकिन फिर भी मेरे घरवालों ने जबरदस्ती करते हुए मेरी शादी करवा दी। जब उसकी शादी हुई तो उसका पति बहुत ही अच्छा था। वह उसके साथ अच्छे से रहता है और किसी भी चीज के लिए उसने उसे कभी भी मना नहीं किया। रेखा की जब भी मुझसे फोन पर बात होती है तो वह बहुत ही खुश होती है और कहती है कि मेरा पति मेरे साथ दोस्तों की तरह व्यवहार करता है और हम दोनों बहुत ही अच्छे से रह रहे हैं। मैं भी उसकी बात सुनकर बहुत खुश हो जाती हूं।  मैं उसे कहती हूं कि, चलो कम से कम तुम्हारे घर वालों का फैसला गलत तो नहीं हुआ। नहीं तो तुम अपने घर वालों को जिंदगी भर सुनाती रहती। मैं अपनी जिंदगी में बहुत ही खुश थी और मुझसे कहती रहती थी कि तुम भी जल्दी से शादी कर लो। मैंने उसे कहा तुम्हारे जैसा पति हर किसी को नहीं मिल जाएगा। इसलिए मैं शादी नहीं करना चाहती। अब मैं भी अपने कामों में लगी हुई थी और मुझे समय का पता ही नहीं चल रहा था कब समय बीता जा रहा है। मैं अपने आपको बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस कर रही थी।

एक दिन रेखा ने मुझे फोन किया और मुझे कहने लगी कि मैं सोच रही हूं कहीं घूम आते हैं। मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम प्लानिंग कर लो और मुझे बता देना। मुझे भी बहुत ज्यादा थकान हो रही है ऐसा लग रहा है जैसे कितने सालों से मैं काम कर रही हूं। मैंने जब रेखा से इस बारे में पूछा कि हम लोग कहां जाएंगे और हमारे साथ कौन-कौन आने वाला है। तो वह कहने लगी कि हमारे साथ कोई भी नहीं आएगा। हम दोनों ही इस बार घूमने चलेंगे। मैंने उसे कहा ठीक है यह तो हम दोनों के लिए बहुत ही अच्छा रहेगा कि हम दोनों एक साथ इतने समय बाद घूमने जाएंगे। हम दोनों बहुत ही खुश थे। हम लोगों ने मनाली घूमने का प्लान बनाया और हम लोग मनाली चले गए। जब हम मनाली गए तो वहां की सुंदर वादियां हमें अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। हमें बहुत ही अच्छा लगा था क्योंकि मौसम भी बहुत सुहावना बना हुआ था। रेखा भी बहुत खुश थी और कह रही थी कि इतने सालों बाद अपने लिए समय निकाल पाए हैं। नहीं तो अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं हो पाता है।

मैंने भी रेखा से कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुमने इस तरीके से प्लानिंग कर ली। हमने मनाली पहुंच कर एक होटल में रूम ले लिया और हम दोनों बैठ कर काफी बातें करने लगे। उस दिन तो हमने सोचा कि हम लोग कहीं नहीं जाएंगे। अगले दिन ही हम लोग जाएंगे। आज हम आसपास ही घूम लेंगे। जब मैंने अपने कमरे की खिड़की खोली तो पीछे की जगह पर एक घर था। वहां पर एक लड़का छत में बैठकर अपने लैपटॉप में काम कर रहा था। वह मुझे दूर से दिखाई दे रहा था लेकिन वह बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैं सोच रही थी कि उस लड़के से कैसे बात की जाए। मैंने जब यह बात रेखा से कही तो वह कहने लगी कि हम लोग उस लड़के से बात कर लेते हैं। मैंने उसे कहा कि लेकिन हम लोग उसके घर पर जाएंगे कैसे। वो कहने लगी कि थोड़ी देर बाद हम लोग उस तरफ जाकर देखते हैं। जब हम लोग पीछे की तरफ गए तो वह लड़का बैठकर अपने लैपटॉप में काम कर रहा था। जैसे ही उसने हमें देखा तो वह मुस्कुराने लगा। मैं भी उसे देखकर मुस्कुराने लगी और रेखा भी हंस रही थी। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मुझे उस लड़के से बात करनी चाहिए लेकिन हम लोग उसे जानते नहीं थे। इस वजह से मैं उससे बात नहीं कर सकती थी। थोड़ी देर बाद हम लोग अपने होटल ऑफिस चले गए।

अगले दिन जब हम लोग घूम रहे थे तो हमने सोचा कि आज हम लोग बस से ही घूमते हैं। जब हम बस से घूम रहे थे तो मुझे वही लड़का बस में दिखाई दिया। जब वह मेरे पास आया तो मैंने उससे बात कर लिया और उससे उसका नाम पूछा। उसका नाम दिलीप था। वह भी मुझसे बात कर रहा था और मैंने उसे बताया कि हम लोग कुछ दिनों के लिए मनाली घूमने आए हुए हैं। वह बहुत ही हैंडसम था और अच्छा दिख रहा था। अब उसने मुझसे मेरा नंबर ले लिया और मैंने उसे अपना नंबर दे दिया। थोड़े आगे जब बस रुकी तो वह उतर गया और हम लोग आगे की तरफ निकल गए। मैं सोचने लगी कि शायद दिलीप मुझे फोन करेगा या फिर मैं उसे फोन करूं लेकिन दिलीप का ही फोन मुझे आ गया और जब उसका फोन मुझे आया तो मैंने उससे पूछा कि तुमने कैसे फोन कर लिया। वह कहने लगा कि बस ऐसे ही सोच रहा था कि तुमसे बात कर लेता हूं। अब हम दोनों आपस में बातें करने लगे। मैंने उसे कहा कि तुम हमें मनाली घुमा सकते हो। वह कहने लगा ठीक है मैं तुम्हें मनाली घुमा देता हूं। अब वह हमें मनाली घुमाने लगा। वह हमें अच्छे से सब जगह ले कर गया। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था जब दिलीप हमारे साथ था। वह बहुत ही अच्छी बातें कर रहा था और मुझे अच्छा लग रहा था। एक दिन उसने कहा कि तुम हमारे घर पर चलो। मैंने उसे कहा कि तुम्हारे घर पर हम लोग क्या करेंगे। वह कहने लगा चलो तुम्हें अच्छा नहीं लगा तो वापस आ जाना। अब हम लोग उसके साथ उसके घर चले गए। जब हम उसके घर गए तो उसी घर में उसके माता-पिता और उसकी छोटी बहन थी। हम लोगों को बहुत ही अच्छा लगा जब हम उन लोगों से मिले। वह लोग बहुत ही अच्छे थे। उसके बाद हम लोग होटल में आ गए।

अगले दिन जब दिलीप हमारे रूम में आया तो मैं बाथरुम से बाहर आई मैं एकदम नंगी थी और दिलीप ने मुझे देख लिया। उसके बाद उससे रहा नहीं गया। हम दोनों बैठ कर बाते करते रहे और आरती अब फ्रेश होने चली गई थी। दिलीप जब मेरे पास बैठा हुआ था तो वह मेरी जांघों पर हाथ फेरने लगा और बहुत ही अच्छे से मेरी जांघों को दबाने लगा। मुझसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ मैंने अपने आप को उसके आगे समर्पित कर दिया। उसने मुझे बिस्तर पर लेट कर अपने दोनों पैरो को खोल दिया। उसने मेरी चूत को चाटा और उसके बाद उसने मेरे चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही उसने अपने लंड को डाला तो मैं चिल्लाने लगी और मुझे बहुत ही मजा आने लगा। उसने बहुत देर तक मेरे साथ संभोग किया जिससे कि मेरा पूरा शरीर हिलता जाता। वह मेरे स्तनों को दबाते हुए अपने मुंह के अंदर समा रहा था और मुझे बहुत आनंद आ रहा था थोड़ी देर बाद उसने अपने लंड को निकालते हुए मेरे मुंह के अंदर डाल दिया। मैं उसे बहुत अच्छे से चूस रही थी और चुसते चुसते उसका वीर्य मेरे मुंह के अंदर गिर गया। जैसी ही उसका वीर्य मेरे मुंह में गिरा तो तब तक आरती भी बाहर आ चुकी थी। आरती से भी रहा नहीं गया और उसने भी अपने कपड़े खोल दिए। उसने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया दिलीप ने तुरंत ही अपने मोटे लंड को उसकी योनि मे डाल दिया और उसे चोदना शुरू किया। वह उसे इतने अच्छे से चोद रहा था कि वो बड़ी तेज आवाज निकाल रही थी। दिलीप उसे बड़ी तीव्र गति से झटके दिए जा रहा था। उसका शरीर पूरा हिल रहा था और आरती भी उत्तेजित होने लगी। कुछ देर बाद आरती झड़ गई तो आरती अपने पैर खोल कर ऐसे ही लेटी रही। दिलीप ने अब इतनी तेज तेज झटके मारे कि उन झटकों के बीच में ही उसका वीर्य पतन हो गया। उसने अपने लंड को बाहर निकाला और हम तीनों बहुत ही ज्यादा खुश थे। उसके बाद मैं मुंबई लौट गई पर कभी कभार मे दिलीप से फोन पर बात कर लिया करती हूं।


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