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सुबह के वक्त सेक्स करने का मजा

Subah ke waqt sex karne ka maja:

antarvasna, hindi sex stories

मेरा नाम अरुण है मैं मेरठ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 35 वर्ष है और मेरी शादी को दो वर्ष हो चुके हैं। मेरी पत्नी और मेरी मुलाकात स्कूल के दौरान हुई। मैं स्कूल में अध्यापक था और मेरी पत्नी भी उसी स्कूल में पढ़ाती थी। जब मेरी मुलाकात मेरी पत्नी आकांक्षा से हुई तो मैं उसे देखकर अपने दिल पर काबू नहीं रख पाया और मैंने उसे शादी के लिए कह दिया। उसने मुझे कहा कि आप मेरे पिताजी से इस बारे में बात करिएगा। मैंने भी अपने मम्मी और पापा को आकांक्षा के घर भेज दिया। आकांक्षा के परिवार के सदस्य भी मुझसे शादी करने से मना ना कर सके और हम दोनों की शादी हो गई।

जब हम दोनों की शादी हुई तो उसके कुछ समय तक तो हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ाते रहे लेकिन कुछ समय पहले मेरा ट्रांसफर आगरा में हो गया। जब मेरा ट्रांसफर आगरा हुआ तो मैंने सोचा कि अब मैं अकेले कैसे रहूंगा क्योंकि ना तो मुझे खाना बनाना आता है और ना ही मेरे साथ मेरी पत्नी रहने वाली थी लेकिन मुझे आगरा जाना ही पड़ा। जब मैं आगरा गया तो मैंने वहां रहने का बंदोबस्त कर दिया और मैं एक होटल में खाना खाने लगा। मैं अक्सर उसी होटल में खाना खाता था। मेरी पत्नी को मेरी बहुत चिंता होती। वह मुझे फोन कर देती और कहती कि आप अकेले कैसे मैनेज कर रहे हैं? मैं आकांक्षा को कहने लगा कि मैंनेज तो अब करना ही पड़ेगा। यह नौकरी का सवाल है यदि मैं एडजेस्ट नहीं करूंगा तो शायद नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। उसके कुछ समय बाद स्कूलों की एक दो महीने की छुट्टियां पढ़ने वाली थी। जब छुट्टियां पड़ गयी तो उस वक्त आकांक्षा और मैं साथ में ही समय बिताने लगे। हम दोनों काफी समय साथ में ही थे और जब छुट्टियां खत्म हो गई तो मुझे उसके बाद आगरा जाना पड़ा। मैं जब आगरा गया तो मेरा मन नहीं लग रहा था लेकिन मुझे अब नौकरी तो करनी ही थी और मुझे खाना बनाने की समस्या भी होने लगी। मैं जिस जगह खाना खाता था वहां पर भी मुझे तकलीफ होने लगी। मैंने अपनी पत्नी आकांक्षा को फोन किया तो वह कहने लगी तुम किसी को खाना बनाने के लिए रख लो।

मैंने अपने स्कूल में भी इस बारे में बात की लेकिन मुझे कोई भी खाना बनाने के लिए नहीं मिला और उसके बाद मुझे एक दिन मेरे पड़ोस के मेरे एक मित्र हैं उन्होंने कहा कि मैं एक महिला को जानता हूं वह कभी कबार हमारे घर पर खाना बनाने आ जाती है यदि आप कहे तो मैं उससे बात कर लूं? मैंने उन्हें कहा आप उससे जरूर बात कर लीजिएगा क्योंकि मेरे पास तो समय नहीं हो पाता और मुझे काफी तकलीफ भी हो रही है इसलिए आप उसे जरूर बात कर लीजिए। उन्होंने उस महिला से बात कर ली और जब उन महिला से बात हुई तो मेरी मुलाकात उससे छुट्टी के दिन ही हो पाई। मैंने उनका नाम पूछा। उनका नाम सविता है। मैंने उन्हें सारी चीजें समझा दिया और कहा कि मुझे खाना बनाना बिल्कुल भी नहीं आता तो वह कहने लगे कि साहब आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं सुबह के वक्त आपके लिए खाना बना दिया करूंगी और आपके घर की साफ सफाई कर दूंगी और शाम के वक्त भी मैं आपके लिए खाना बना दिया करूंगी। मैंने उसे कहा कि जब सुबह तुम नाश्ता बनायोगी तो उस वक्त मेरे लिए टिफिन भी बना देना क्योंकि मैं स्कूल में ही लंच करता हूं। अब हम दोनों की सहमति से पैसे की बात हो गई। मैंने सविता को काम पर रख लिया वह काम अच्छे से करने लगी और मुझे उसके काम में कोई भी शिकायत नहीं मिलती इसलिए वह खुश होकर काम करने लगी और मेरा भी काफी हद तक समय बचने लगा था क्योंकि पहले मैं जिन व्यक्ति के पास खाना खाने जाता था वहां पर काफी भीड़ होती थी और मुझे देर भी हो जाती थी।  एक दिन मैं घर पर ही था उस दिन आकांक्षा का फोन आ गया। आकांक्षा मुझे कहने लगी कि अब तो आपने नौकरानी रख ली है अब आपको कोई तकलीफ नहीं होगी। मैंने आकांक्षा से कहा अब तो मैं बहुत खुश हूं क्योंकि अब मुझे सही वक्त पर खाना मिल जाता है और मेरी काफी हद तक समस्या दूर हो चुकी है। आकांक्षा को भी अब मेरी चिंता नहीं होती लेकिन मैं उससे अक्सर फोन पर बात कर लिया करता हूं। मैं जब सुबह स्कूल जाता हूं तो उस वक्त सविता मुझे टिफिन दे देती है और जब मैं घर लौटता तो वह मेरे लिए खाना बना कर रखती थी।

एक दिन मैं घर पर ही था उस दिन सविता नहीं आई उस दिन शायद उसकी तबीयत खराब हो गई थे। मैंने जब उसे फोन किया तो वह कहने लगी साहब आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मैं आज नहीं आ पाऊंगी। जब सविता ने उस दिन मुझसे कहा तो मैंने कहा कोई बात नहीं तुम कल आ जाना यह कहते हुए मैंने फोन रख दिया और उस दिन मैंने बाहर ही खाना खाया। उस दिन मैं रात तक आकांक्षा के साथ बात करता रहा क्योंकि अगले दिन भी मेरी छुट्टी थी और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गई और मैं सो गया। अगले दिन जब मैं सुबह उठा तो मेरी आंख उस दिन सुबह जल्दी खुल गई। मैं अगले दिन सुबह पांच बजे ही उठ गया था। मैंने सोचा कि चलो आज मैं अपने कपड़ों को अच्छे से रख देता हूं। मैं सुबह उठकर अपने कपड़ों को रखने लगा तभी सविता आ गई और सविता कहने लगी साहब आज तो आप खुद ही सफाई कर रहे हैं लगता है मुझे नौकरी छोड़ने पड़ेगी। जब उसने यह बात कही तो मैं हंसने लगा और उसे भी बहुत ज्यादा हंसी आ गई। मैंने उससे कहा नहीं ऐसी बात नहीं है आज मैं सुबह जल्दी उठ गया था तो सोचा अपना काम खुद कर लूं।

सविता साफ सफाई का काम करने लगी जब वह सफाई का काम कर रही थी तो उस वक्त उसने अपनी सलवार के पल्लू को अपने कमर से बांधा हुआ था। उसकी बड़ी गांड मेरी नजरों के सामने आ रही थी तो मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैं उसकी चूत मारने के लिए उतारू होने लगा। मैंने लंड को बाहर निकाल दिया जैसे ही सविता ने मेरे लंड को देखा तो वह कहने लगी साहब आप यह क्या कर रहे हैं? मैंने उसे कहा मैं तुम्हें पैसे दूंगा तुम मेरे पास आ जाओ। मैंने उसे पैसे दिए और वह मेरे पास आ गई उसने जब मेरे गर्म लंड को अपने हाथ में लिया तो वह कहने लगी आज मैं आपकी इच्छा पूरी कर देती हूं। उसने जैसे ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा वह मेरे लंड को अपने गले तक लेने लगी।

मेरी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी। मैंने जल्दी से सविता के कपड़े उतार दिए और जैसे ही मैंने उसे नंगा किया तो उसके बदन को देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया मेरा लंड जैसे ही उसकी चूत के अंदर घुसा तो उसके मुंह से आवाज निकल आई और मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा। मैंने उसे इतनी तेज गति से धक्के दिए कि उसकी चूत से तरल पदार्थ बड़ी तेजी से बाहर आने लगा और मेरा लंड भी उसकी योनि के अंदर जाकर अपने आप को अच्छा महसूस कर रहा था। मेरा लंड उसकी चूत की गहराइयों में जाता तो मुझे और भी मजा आ जाता। मैंने काफी देर तक उसकी चूत मारी लेकिन उसकी चूत से जो आग बाहर की तरफ को निकल रही थी उसे मैं ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया। जैसे ही मेरा गरमा गरम वीर्य उसकी योनि के अंदर गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। उसके कुछ देर बाद उसने मेरे लंड को सकिंग करना शुरू कर दिया। मेरा लंड दोबारा से खड़ा हो गया उसे बहुत मजा आने लगा। मैंने दोबारा से उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जब मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता तो मुझे अच्छा महसूस हुआ। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा करने लगी और कहने लगी साहब आप अपने लंड को मेरी चूत की गहराइयों में उतार दो। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक जाने लगा वह कहती मुझे बहुत अच्छा महसूस होता जब आप मेरी योनि के अंदर अपना लंड डालते है। उसने मेरी इच्छा बड़े अच्छे से पूरी कर दी। जब मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने उसके बड़े और भारी भरकम स्तनों पर अपने वीर्य को गिरा दिया। वह मुझे कहने लगी आज तो आपने मेरी इच्छा पूरी कर दी सुबह सेक्स करना कितना मजेदार होता है। कल से मैं आपके साथ हमेशा सेक्स करूंगी। मैंने उसे कहा हां कल सुबह से मैं तुम्हारे साथ सेक्स करके ही स्कूल जाया करूंगा। उसके बाद में हर सुबह उसके साथ सेक्स करता और अपने स्कूल चला जाता।


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